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Friday, September 29, 2017

डिग्रियों की कीमत

रुस के प्रशिद्ध लेखक लियो टॉलस्टाय को  एक बार अपना काम काज देखने के लिए एक आदमी की जरुरत पड़ी। इस बारे में उन्होंने अपने एक मित्र को भी बताया और कहा की यदि कोई ऐसा व्यक्ति मिले तो उसे मेरे पास भेज देना। 
कुछ दिनों बाद उनके मित्र ने एक व्यक्ति को उनके भेजा। वह काफी पढ़ा लिखा था  और उसके  पास कुछ  सर्टिफिकेट और डिग्रियां भी थी। वह व्यक्ति टॉलस्टाय से मिला लेकिन तमाम डिग्रियां होने के बावजूद टॉलस्टाय ने उसे नौकरी पर नहीं रखा , बल्कि एक अन्य व्यक्ति जिसके पास कोई डिग्री थी  उसे नौकरी के लिए चयन कर लिया ------------------------ 
मित्र ने कहा क्या "मैं इसका कारण जान सकता हूँ ?"
टॉलस्टाय ने बताया ," मित्र जिस व्यक्ति का मैंने चयन किया हैं उसके पास तो अमूल्य प्रमाणपत्र हैं , उसने कमरे में आने के पूर्व मेरी अनुमति मांगी और दरवाजे पर रखे गए पायदान पर जूते साफ़ करके कमरे में प्रवेश किया। उसके कपडे साधारण थे, लेकिन  साफ़-सुथरे थे। मैंने उससे जो भी प्रश्न किये उसका उत्तर बिना घुमाये-फिराए संछिपत उत्तर दिया, और अंत में वह मुलाकात पूरी होने के बाद मेरी आज्ञा लेकर बड़ी विनर्मता के साथ चला गया। उसने कोई खुशामद नहीं की , न ही किसी  सिफारिश लाया, उसे  काबलियत पर विश्वाश था, इतने सारे प्रमाणपत्र  बहुत कम लोगो के पास होते हैं। 
और तुमने  व्यक्ति को भेजा था उसके पास इसमें से कोई भी प्रमाणपत्र नहीं था , वह सीधे कमरे में प्रवेश कर गया और बिना मेरी आज्ञा के कुर्सी पर बैठ गया, और अपनी काबलियत की जगह तुमसे मेरी जान पहचान बताने लगा तुम्ही बताओ , उसकी इन डिग्रीयों की क्या कीमत हैं?
मित्र टॉलस्टाय की बात समझ गया वह भी असल प्रमाणपत्र  की कीमत जान चुका था। 

Friday, October 28, 2016

नामुमकिन कुछ भी नहीं (Nothing is impossible)

Nothing is Impossible
एक  समय की बात है, दो दोस्त थे एक का नाम जग्गू और दूसरे का नाम राजू था। इनकी उम्र में लगभग चार वर्ष का अंतर था। राजू की उम्र 8 वर्ष और जग्गू  की उम्र लगभग 12 वर्ष थी। एक बार दोनों खेलतें खेलतें अपने गांव से दूर निकल गये। खेल खेल में ही जग्गू अचानक कुँए में जा गिरा और वो मदद के लिए चिल्लाने लगा लेकिन गांव से दूर उन मासूमो की मदद के लिए कोई नहीं आया। धीरे धीरे काफी समय हो गया लेकिन जग्गू कुँए से निकल नहीं पाया और राजू जग्गू के लिए परेशान रहा। अचानक राजू को वही पर रस्सी पड़ी मिली और उसने उस रस्सी  जग्गू को खींचकर बाहर निकलने का प्रयास किया और वो अपने प्रयास में काफी देर बाद सफल हुआ। 
अब वो दोनों सकुशल अपने गांव लौट आये और उन्होंने अपने पुरे दिन की कहानी सुनाई लेकिन उनकी इस कहानी पर किसी ने यकीन नहीं किया और सभी ने कहा की एक 8 साल का बच्चा एक 12 साल के बच्चे को कैसे कुँए से खींचकर कैसे बाहर निकल सकता है। तभी वहाँ पर बैठे एक बुजुर्ग ने  कहा की ऐसा बिलकुल हो सकता है ये दोनों बच्चे सच कह रहें है। ये राजू बिलकुल ऐसा कर सकता है क्योंकि इसको वहाँ पर कोई ये कहने वाला नहीं था की ये नहीं कर सकता लेकिन यदि ये यहां गांव में होता तो आप लोग इसका मनोबल गिरा देते और राजू ये कार्य नहीं कर पता। 
यह सही है दोस्तों जब भी हम कोई नया काम करतें हैं तो हमसे कहा जाता है की यह तो बहुत कठिन काम है, तुम ये नहीं कर सकतें, ऐसा हो ही नहीं सकता और असफल लोगो के उदहारण सुनने को मिलतें हैं जिससे हमारे अंदर नेगेटिव ऊर्जा आती है और हमारे मन में भी ये ख्याल आने लगता है की हम यह काम कर पायेंगे या नहीं।
इसलिए दोस्तों मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि यदि  कोई नया  और अच्छा कार्य कर रहा है तो उसे यदि आप सहयोग नहीं कर सकते तो कम से कम उसका मनोबल न गिराए और उसे अच्छा कार्य करने के लिए प्ररित करें।
इस कहानी को पूरा पड़ने के लिए आपका धन्यवाद, यदि आपको ये पोस्ट पसन्द आये तो इस कहानी को अपने Facebook Page पर और Whatsapp पर शेयर करें और मेरी नई पोस्ट के लिए मुझे फॉलो करें।
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